लेख: कुलदीप सगर
जब मैं केन्या में काम कर रहा था, तब मुझे रिफ्ट वैली (Rift Valley) की यात्रा करने का अवसर मिला था। इसी क्षेत्र में स्थित है प्रसिद्ध नाकुरु झील (Lake Nakuru), जो विश्व स्तर पर अपने प्राकृतिक सौंदर्य और पक्षियों की विशाल विविधता के लिए जाना जाता है।
लेक नाकुरु का क्षेत्रफल लगभग 188 वर्ग किलोमीटर है। इस झील की औसत गहराई करीब 4 मीटर और अधिकतम गहराई लगभग 6 मीटर है। यह झील रिफ्ट वैली का हिस्सा है और इसमें नदियों तथा वर्षा का पानी आता है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता इसके तटों पर दिखने वाले लाखों फ्लेमिंगो हैं, जिनकी वजह से यह झील विश्व पर्यटन का केंद्र बनी हुई है।
लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर यहाँ भी साफ दिखाई देता है। बीते वर्षों में झील के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। जब मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि झील के किनारे पर खड़े बहुत से पेड़ अब पानी में डूब चुके हैं और सूखकर खड़े-खड़े ही मर गए हैं। मैंने वहाँ साथ आए वन अधिकारी (Forest Officer) से पूछा कि इन पेड़ों को लकड़ी के लिए क्यों नहीं काट लिया जाता? उनका उत्तर था “इन पेड़ों का सड़ना और धीरे-धीरे पानी में मिलना ही प्राकृतिक प्रक्रिया है। इन्हें वैसे ही छोड़ दिया जाना चाहिए।”

नाकुरु झील और उसके आसपास का इलाका वन्यजीवों की समृद्ध विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ काला गैंडा (Black Rhino), सफेद गैंडा (White Rhino), जिराफ, हिप्पोपोटेमस, सिंह, वन्य भैंस, बन्दर, ज़ीब्रा और विभिन्न प्रकार की हिरण प्रजातियाँ पाई जाती हैं। पक्षियों की 450 से अधिक प्रजातियाँ यहाँ दर्ज की गई हैं।
केन्या के लेक नाकुरु में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने एक समय में यह स्थान फ्लेमिंगो की रंग-बिरंगी छटा और जैव विविधता का अद्भुत आधार था, अब इससे कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जल स्तर में तेजी से वृद्धि (2009 में लगभग 35 km² से बढ़कर 2018 तक 54 km² तक) ने न केवल झील के तटीय पारिस्थितिक तंत्र को बाधित किया, बल्कि इसके क्षारीय पानी का नमकीनपन भी घट गया, जिससे नीले-हरे शैवालों (blue-green algae) का विकास कम हो गया और फ्लेमिंगो का प्रमुख आहार संकट में आ गया। इससे पक्षियों की आबादी घटकर कुछ अन्य झीलों की ओर पलायन कर गई है। इसके अलावा, बाढ़ से प्रभावित स्थानीय लोग अपने घरों से विस्थापित हो रहे हैं, कृषि भूमि जलमग्न होकर मछली पकड़ने जैसी अस्थायी आय के साधन बन रही है, हालांकि कई लोग पानी से दूषित मछलियों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी व्यक्त कर रहे हैं।
मैंने कुछ युवा चीतल (Spotted Deer) देखे। मुझे आश्चर्य हुआ कि ये युवा नर हिरण अपने झुंड (herd) से अलग क्यों हैं? जब मैंने यह प्रश्न वन अधिकारी से पूछा तो उन्होंने समझाया कि ये सभी युवा नर हिरण हैं जिन्हें उनके समूह के अल्फ़ा मेल (Alpha Male) ने बाहर निकाल दिया है। अल्फ़ा मेल झुंड पर अपना नियंत्रण बनाए रखता है और किसी भी प्रतिद्वंद्वी नर को झुंड में रहने नहीं देता। यह प्रकृति का नियम है, ताकि झुंड में एक ही नर का प्रभुत्व रहे और वह मादाओं के साथ प्रजनन कर सके। उन्होंने आगे कहा कि “एक दिन यही युवा नर आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे और उनमें से कोई एक अल्फ़ा बनेगा, जो मौजूदा अल्फ़ा मेल को चुनौती देगा और अंततः उसे हरा कर झुंड का नेतृत्व संभालेगा।”

इस अनुभव से मुझे यह समझ में आया कि नाकुरु झील केवल एक झील नहीं, बल्कि प्रकृति के अद्भुत संतुलन का प्रतीक है। यहाँ जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभाव से लेकर वन्य जीवों के सामाजिक व्यवहार तक, सबकुछ हमें यह सिखाता है कि जीवन निरंतर संघर्ष और अनुकूलन की प्रक्रिया है।

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